भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन को लेकर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर नई दिल्ली पर है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित BRICS देशों के प्रमुख नेता इस सम्मेलन में शामिल होंगे। भारत के लिए यह सम्मेलन कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने 2026 की BRICS अध्यक्षता के लिए Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को मुख्य विचार बनाया है। इसके साथ “Humanity First” यानी मानवता को प्राथमिकता देने की सोच पर भी जोर दिया गया है।
BRICS की शुरुआत चार देशों-ब्राजील, रूस, भारत और चीन-के साथ हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा और इसका नाम BRICS हुआ। इसके बाद संगठन का विस्तार होता गया। वर्तमान में BRICS में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं।
BRICS क्या है
BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंच है। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात तथा इंडोनेशिया इसके पूर्ण सदस्य बने। वर्तमान में BRICS में 11 पूर्ण सदस्य देश हैं-ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया।
BRICS में कितने देश हैं
वर्तमान में BRICS में 11 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 में पूर्ण सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना।
| क्रम | देश |
|---|---|
| 1 | ब्राजील |
| 2 | रूस |
| 3 | भारत |
| 4 | चीन |
| 5 | दक्षिण अफ्रीका |
| 6 | मिस्र |
| 7 | इथियोपिया |
| 8 | ईरान |
| 9 | सऊदी अरब |
| 10 | संयुक्त अरब अमीरात |
| 11 | इंडोनेशिया |
BRICS में पूर्ण सदस्यों के अलावा साझेदार देशों की व्यवस्था भी है। 2025 में बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को साझेदार देशों के रूप में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई थी।
2009 से 2026 तक BRICS Summit
BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग से हुई थी। पिछले वर्षों में संगठन का एजेंडा लगातार विस्तृत हुआ है। आर्थिक और वित्तीय सहयोग से शुरू हुई चर्चा आज आतंकवाद, व्यापार, WTO, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोजगार और वैश्विक शासन जैसे विषयों तक पहुंच चुकी है।
| वर्ष | Summit | मेजबान | प्रमुख बात |
|---|---|---|---|
| 2009 | 1st | येकातेरिनबर्ग, रूस | BRIC का पहला Leaders Summit |
| 2010 | 2nd | ब्रासीलिया, ब्राजील | वैश्विक वित्तीय सुधार और व्यापार |
| 2011 | 3rd | सान्या, चीन | दक्षिण अफ्रीका शामिल, BRIC बना BRICS |
| 2012 | 4th | नई दिल्ली, भारत | New Development Bank का विचार आगे बढ़ा |
| 2013 | 5th | डरबन, दक्षिण अफ्रीका | NDB और Reserve Arrangement की दिशा में प्रगति |
| 2014 | 6th | फोर्टालेजा, ब्राजील | NDB और CRA की स्थापना के समझौते |
| 2015 | 7th | उफा, रूस | Economic Partnership और व्यापार सहयोग |
| 2016 | 8th | गोवा, भारत | NDB/CRA का संचालन और Renewable Energy |
| 2017 | 9th | श्यामेन, चीन | Digital Economy, Trade और Health |
| 2018 | 10th | जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका | 4th Industrial Revolution और Inclusive Growth |
| 2019 | 11th | ब्रासीलिया, ब्राजील | Economic Growth, Innovation और Climate |
| 2020 | 12th | रूस की मेजबानी, ऑनलाइन | COVID-19 और Global Health |
| 2021 | 13th | भारत की अध्यक्षता, ऑनलाइन | BRICS@15, Health और Satellite Cooperation |
| 2022 | 14th | चीन की अध्यक्षता, ऑनलाइन | Food-Energy Security और Post-Pandemic Recovery |
| 2023 | 15th | जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका | BRICS Expansion का बड़ा फैसला |
| 2024 | 16th | कज़ान, रूस | नए सदस्यों के साथ विस्तारित BRICS |
| 2025 | 17th | रियो डी जेनेरियो, ब्राजील | Global South, Climate, Health और AI |
| 2026 | 18th | नई दिल्ली, भारत | भारत की अध्यक्षता और BRICS की नई दिशा |
2009 में पहला सम्मेलन उस समय हुआ जब दुनिया 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के प्रभाव से जूझ रही थी। BRIC देशों ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद BRIC का विस्तार BRICS में हुआ। इसके साथ अफ्रीकी महाद्वीप की भागीदारी भी बढ़ी। 2012 के नई दिल्ली सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तथा विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे। इसी दौरान नए विकास बैंक यानी NDB की दिशा में विचार आगे बढ़ा।
2014 के फोर्टालेजा सम्मेलन में नए विकास बैंक और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था यानी CRA की स्थापना से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते हुए। इससे BRICS का आर्थिक सहयोग केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्थागत रूप लेने लगा। इसके बाद BRICS के एजेंडे में डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, जलवायु, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, कृषि, रोजगार और तकनीकी सहयोग जैसे नए क्षेत्र जुड़ते गए। 2023 के जोहान्सबर्ग सम्मेलन के बाद BRICS के विस्तार का रास्ता खुला और 2024 में नए सदस्यों के शामिल होने से इसका दायरा काफी बढ़ गया। 2025 में इंडोनेशिया के पूर्ण सदस्य बनने से सदस्य देशों की संख्या 11 हो गई। अब 2026 में भारत की मेजबानी में होने वाला 18वां सम्मेलन इस विस्तारित BRICS के सामने नई प्राथमिकताएं तय करने का अवसर है।
18वां BRICS Summit 2026 कब और कहां होगा
18वां BRICS Summit 2026 भारत में 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, व्यापार और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। 12 सितंबर को सदस्य देशों के नेताओं की बंद कमरे में बैठक होगी। इसके बाद भारत मंडपम में प्रदर्शनी का दौरा, सामूहिक फोटो और पौधरोपण जैसे कार्यक्रम होंगे। शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेताओं के सम्मान में रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा।
13 सितंबर को मुख्य सत्र आयोजित होगा, जिसमें सदस्य देशों के साथ साझेदार और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। सम्मेलन के अंत में नई दिल्ली घोषणा जारी की जाएगी, जिसमें सदस्य देशों के बीच बनी सहमति और भविष्य की दिशा सामने आ सकती है। भारत की अध्यक्षता में पूरे वर्ष BRICS से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों और क्षेत्रों की बैठकें आयोजित हुई हैं। इन बैठकों में व्यापार, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम किया गया है। भारत ने इस बार BRICS के एजेंडे में केवल आर्थिक विकास को ही नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित विकास, तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता को भी महत्व दिया है।
भारत की कूटनीति का बड़ा मंच बना BRICS, दिल्ली में दिखेगा नया संदेश
भारत में होने वाला 18वां BRICS सम्मेलन कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ही मंच पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी भारत की कूटनीतिक भूमिका को खास बनाती है। चीन के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां उसे रूस और चीन जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत का अवसर मिलेगा। साथ ही भारत BRICS के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं और वैश्विक दक्षिण की आवाज को भी मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।
भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करता रहा है। BRICS इसी व्यापक बहुपक्षीय व्यवस्था में अधिक संतुलन की मांग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। भारत का संदेश यह है कि वैश्विक व्यवस्था में आर्थिक और राजनीतिक फैसलों में विकासशील देशों की भूमिका बढ़नी चाहिए। यही वजह है कि नई दिल्ली सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आतंकवाद, सुरक्षा, युद्ध और वैश्विक राजनीति पर BRICS में क्या चर्चा होगी
BRICS के गठन के शुरुआती वर्षों से ही आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। 2009 के पहले सम्मेलन से लेकर बाद के सम्मेलनों तक सदस्य देशों ने आतंकवाद की निंदा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है। 2026 का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव जारी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव और अमेरिका-चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसी परिस्थितियों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया का मुद्दा इस सम्मेलन के लिए विशेष रूप से संवेदनशील हो सकता है क्योंकि BRICS में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। अलग-अलग देशों के हित और क्षेत्रीय परिस्थितियां BRICS में किसी एक साझा राजनीतिक रुख पर पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं।
भारत की नीति लंबे समय से यह रही है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। इसलिए BRICS में युद्धों के आर्थिक प्रभाव, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग भी भारत के लिए प्रमुख मुद्दा रहेगा। भारत चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी और एकजुट कार्रवाई हो तथा आतंकवाद को किसी भी रूप में उचित ठहराने की कोशिश न की जाए।
खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, कृषि, जलवायु और आपदा प्रबंधन क्यों होंगे महत्वपूर्ण
खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं, मौसम में बदलाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ सकता है। BRICS देशों के बीच कृषि क्षेत्र में तकनीक, उत्पादन, भंडारण, कृषि अनुसंधान और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर सहयोग बढ़ाया जा सकता है। भारत के लिए कृषि इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि करोड़ों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।
ऊर्जा के क्षेत्र में तेल और गैस के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा की कीमत और आपूर्ति की स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। जलवायु परिवर्तन भी BRICS के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाढ़, सूखा, चक्रवात और बढ़ते तापमान जैसी घटनाओं का विकासशील देशों पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए जलवायु वित्त, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर सहयोग आवश्यक है।
आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच शुरुआती चेतावनी प्रणाली, राहत एवं बचाव व्यवस्था, आपदा के बाद पुनर्निर्माण और तकनीकी सहयोग को मजबूत किया जा सकता है। भारत की अध्यक्षता में सतत विकास को विशेष महत्व दिया गया है। यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे नई दिल्ली सम्मेलन में भी महत्वपूर्ण रह सकते हैं।
व्यापार, WTO, वित्तीय व्यवस्था और स्थानीय मुद्रा
BRICS की शुरुआत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक सहयोग के विचार से हुई थी। इसलिए व्यापार और निवेश आज भी संगठन के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं। सदस्य देश आपसी व्यापार को आसान बनाने, निवेश बढ़ाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के रास्ते तलाश रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए व्यापार और निवेश से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई है। छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए वित्तीय सुविधा, सेवाओं के व्यापार और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।
विश्व व्यापार संगठन यानी WTO से जुड़े मुद्दे भी BRICS के एजेंडे में महत्वपूर्ण हैं। भारत विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यापार व्यवस्था की वकालत करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार BRICS का पुराना मुद्दा है। IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग लंबे समय से BRICS के एजेंडे में रही है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच भुगतान को अधिक आसान बनाना और कुछ परिस्थितियों में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाशना है। हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि BRICS की कोई साझा मुद्रा 2026 में लॉन्च होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए साझा BRICS मुद्रा को लेकर किसी भी दावे को तथ्य के रूप में प्रकाशित नहीं करना चाहिए।
AI, डिजिटल तकनीक, दूरसंचार, Startup, MSME और रोजगार
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI और डिजिटल तकनीक तेजी से दुनिया की अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। ऐसे में BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा, दूरसंचार, अगली पीढ़ी के नेटवर्क, उपग्रह संचार और डिजिटल कौशल जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है। AI के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इसका इस्तेमाल सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित तरीके से कैसे किया जाए। डेटा सुरक्षा, निजता, साइबर सुरक्षा, AI के लिए नियम और विकासशील देशों को नई तकनीक तक पहुंच जैसे विषय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारत की अध्यक्षता में संचार क्षेत्र की बैठकों में डिजिटल व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, डिजिटल कौशल, नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में BRICS Incubator Network तथा Startup Innovation Fund जैसे प्रस्तावों पर काम आगे बढ़ रहा है। इनका उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्टअप और नवाचार संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना है। MSME यानी छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए बाजार, वित्तीय सहायता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के अवसर भी महत्वपूर्ण होंगे। युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार भी भारत की प्राथमिकताओं में हैं। आने वाले समय में AI और नई तकनीक से कई नौकरियों का स्वरूप बदल सकता है। इसलिए BRICS देशों के बीच भविष्य के कौशल और शिक्षा को लेकर सहयोग उपयोगी हो सकता है।
स्वास्थ्य, शिक्षा
BRICS का सहयोग केवल सरकारों और अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा, भी इसके महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। कोविड-19 महामारी ने यह दिखाया कि किसी एक देश की स्वास्थ्य समस्या कुछ ही समय में पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए BRICS देशों के बीच दवाओं, वैक्सीन, स्वास्थ्य तकनीक, चिकित्सा अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर सहयोग महत्वपूर्ण है।
भारत सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के क्षेत्र में अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है। BRICS देशों के बीच स्वास्थ्य तकनीक और चिकित्सा अनुसंधान में सहयोग से विकासशील देशों को फायदा मिल सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान, छात्रवृत्ति, विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और भविष्य के कौशल पर सहयोग बढ़ाने की संभावना है।
युवाओं के लिए उद्यमिता, स्टार्टअप, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। BRICS के सदस्य देशों में बड़ी युवा आबादी है, इसलिए युवा सहयोग को आर्थिक विकास से जोड़ना संगठन के लिए उपयोगी हो सकता है। लोगों के बीच सांस्कृतिक संपर्क, पर्यटन, शिक्षा और खेल जैसे क्षेत्र भी BRICS देशों के बीच आपसी समझ को मजबूत कर सकते हैं।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा और मोदी-शी मुलाकात क्यों महत्वपूर्ण है
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा 18वें BRICS सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक है। चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे। भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, निवेश और रणनीतिक विश्वास जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। इसलिए दोनों नेताओं की मुलाकात को केवल BRICS की बैठक के रूप में नहीं देखा जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच बातचीत में सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ व्यापार, निवेश, बाजार पहुंच और आर्थिक संबंधों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को स्थिर और व्यावहारिक बनाने की कोशिश भी बातचीत का हिस्सा हो सकती है। रिपोर्टों में रणनीतिक आर्थिक संवाद से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना बताई गई है। हालांकि किसी बड़े समझौते या निर्णायक सफलता की घोषणा पहले से मान लेना उचित नहीं होगा। शी जिनपिंग की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद का रास्ता मजबूत हो सकता है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह चीन के साथ बातचीत करते हुए अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखे।
पुतिन की भारत यात्रा, मोदी से मुलाकात और संभावित Su-57 रक्षा डील
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा भी 18वें BRICS सम्मेलन को महत्वपूर्ण बनाती है। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में लंबे समय से रणनीतिक सहयोग रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 11 सितंबर 2026 को शाम 3:30 बजे नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक होने की जानकारी सामने आई है। इस बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीक और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। रूस के साथ रक्षा सहयोग भारत-रूस संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी वजह से BRICS सम्मेलन के दौरान किसी संभावित रक्षा सहयोग पर भी नजर रहेगी।
रिपोर्ट में 75 Su-57 लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि प्रस्ताव में विमानों के साथ हथियार, स्पेयर पार्ट्स, पायलट एवं तकनीकी कर्मचारियों का प्रशिक्षण और रखरखाव जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं। इस पूरे संभावित सौदे की कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि 75 Su-57 विमानों की यह डील अभी आधिकारिक रूप से पक्की नहीं हुई है। इसलिए इसे अंतिम रक्षा सौदा बताने के बजाय संभावित प्रस्ताव या बातचीत के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जब तक भारत सरकार या रूस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इस सौदे को निश्चित मानना सही नहीं होगा।
अगर आगे चलकर इस तरह की बड़ी रक्षा परियोजना पर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है, तो इसका असर भारत की वायु शक्ति और रक्षा तकनीक पर पड़ सकता है। इसके साथ ही भारत और रूस के बीच तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, रखरखाव और भविष्य के रक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिल सकती है।
दिल्ली में BRICS Summit के लिए सुरक्षा, भारत के लिए महत्व और क्या उम्मीद
18वें BRICS शिखर सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए एयरपोर्ट, प्रमुख होटलों, भारत मंडपम और महत्वपूर्ण मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 15,000 पुलिसकर्मियों और 200 कंपनियों अर्धसैनिक बलों की तैनाती तथा हाईटेक कैमरों से निगरानी की जा रही है दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के तहत संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है और यातायात व्यवस्था को भी सम्मेलन के कार्यक्रम के अनुसार नियंत्रित किया जा है।
भारत के लिए 18वां BRICS सम्मेलन कई कारणों से महत्वपूर्ण है। भारत 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्षता कर चुका है। इस बार भारत की प्राथमिकताओं में मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास शामिल हैं। भारत BRICS को ऐसा मंच बनाने की कोशिश कर रहा है जहां वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के साथ-साथ व्यावहारिक सहयोग भी हो। नई दिल्ली सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, आतंकवाद, व्यापार, WTO, निवेश, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था, स्थानीय मुद्रा में भुगतान, दूरसंचार, डिजिटल तकनीक, AI, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और रोजगार जैसे कई विषयों पर चर्चा हो सकती है।
इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी बढ़ाने तथा स्टार्टअप और MSME को आगे बढ़ाने पर भी सहयोग की दिशा तय की जा सकती है। सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम नई दिल्ली घोषणा होगी। इसमें सदस्य देशों के बीच जिन मुद्दों पर सहमति बन पाएगी, उन्हें शामिल किया जा सकता है। BRICS के सामने इस समय एक बड़ी चुनौती यह भी है कि इसके सदस्य देशों के राजनीतिक और आर्थिक हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसी परिस्थितियों में सभी सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
फिर भी BRICS की ताकत यही है कि अलग-अलग विचार और हित रखने वाले देश साझा आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों पर सहयोग कर सकते हैं। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करने का अवसर है। एक तरफ भारत रूस और चीन के साथ BRICS मंच पर बातचीत करेगा, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भी आगे बढ़ाता रहेगा।
18वां BRICS Summit 2026 केवल दो दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं है। इसके पीछे पूरे वर्ष चली बैठकों और विभिन्न क्षेत्रों में हुए सहयोग की प्रक्रिया है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली बैठक से यह तय करने में मदद मिलेगी कि आने वाले वर्षों में BRICS किस दिशा में आगे बढ़ेगा। यदि भारत की अध्यक्षता में BRICS खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, वित्त, WTO सुधार, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, AI, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, स्टार्टअप और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग को आगे बढ़ाने में सफल रहता है, तो इसका फायदा सदस्य देशों के साथ व्यापक वैश्विक दक्षिण को भी मिल सकता है।
