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The History > Biography > साध्वी प्रेम बाईसा भक्ति, त्याग और साधना की प्रेरणादायक जीवनी
Biography

साध्वी प्रेम बाईसा भक्ति, त्याग और साधना की प्रेरणादायक जीवनी

Chetana Choudhary
Last updated: February 7, 2026 13:38
Chetana Choudhary - Written by
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साध्वी प्रेम बाईसा कथा वाचन करते हुए
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राजस्थान की पावन भूमि ने सदैव संतों, भक्तों और आध्यात्मिक विभूतियों को जन्म दिया है। इसी परंपरा की एक सशक्त कड़ी हैं साध्वी प्रेम बाईसा, जिनका नाम आज आध्यात्मिक जगत में गहरी श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। अपनी सरल वाणी, भावपूर्ण कथाओं और कृष्ण-भक्ति से ओतप्रोत भजनों के कारण वे लाखों श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष स्थान बना चुकी हैं। उनके अनुयायी उन्हें स्नेहपूर्वक आधुनिक मीरा कहकर संबोधित करते हैं।

Contents
जन्म और पारिवारिकबचपन और आध्यात्मिककथा वाचन की शुरुआत और शिक्षासाध्वी जीवन और त्यागलोकप्रियता और आधुनिक मीरा की पहचानसाधना कुटी आश्रम और उसका उद्घाटनविचार और संदेश

जन्म और पारिवारिक

साध्वी प्रेम बाईसा का जन्म पश्चिमी राजस्थान में हुआ। उनका जन्म वर्ष लगभग 2000–2001 के आसपास माना जाता है। उनका जन्म जोधपुर जिले के छोटी धनारी गांव में हुआ, जिसे बाद में कृष्ण नगर नाम दिया गया। उनका पारिवारिक जीवन सादगी और संस्कारों से परिपूर्ण रहा। उनके पिता का नाम देवीसिंह राठौड़ बताया जाता है। प्रारंभिक जीवन में वे ट्रक ड्राइवर के रूप में कार्यरत थे, किंतु बाद में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास का मार्ग अपनाया। पिता के वैराग्य और आध्यात्मिक जीवन ने प्रेम बाईसा के व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया।

बचपन और आध्यात्मिक

प्रेम बाईसा का बचपन सामान्य बच्चों से अलग रहा। बचपन से ही उनका मन भौतिक सुख-सुविधाओं की बजाय भक्ति, सत्संग और ईश्वर स्मरण की ओर अधिक आकर्षित रहता था। जहाँ अन्य बच्चे खेल-कूद और आधुनिक जीवन की ओर उन्मुख थे, वहीं प्रेम बाईसा कृष्ण भक्ति के भजनों में लीन रहती थीं। उनके जीवन में सादगी, संयम और करुणा के भाव बचपन से ही दिखाई देने लगे थे।

कथा वाचन की शुरुआत और शिक्षा

साध्वी प्रेम बाईसा ने मात्र 12 वर्ष की आयु में कथा वाचन प्रारंभ कर दिया था। इतनी कम उम्र में शास्त्रों की समझ और भावपूर्ण प्रस्तुति ने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक शिक्षा जोधपुर स्थित गुरुकृपा आश्रम में प्राप्त की, जहाँ उन्हें संत राजाराम महाराज और संत कृपाराम महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ। गुरुओं के मार्गदर्शन में उन्होंने भक्ति, अनुशासन, साधना और सेवा को अपने जीवन का आधार बनाया।

साध्वी जीवन और त्याग

युवा अवस्था में ही प्रेम बाईसा ने सांसारिक आकर्षणों, वैभव और सामाजिक अपेक्षाओं से ऊपर उठकर साध्वी जीवन को अपनाने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके लिए केवल त्याग नहीं, बल्कि आत्मिक स्वतंत्रता और ईश्वर समर्पण का मार्ग था। उन्होंने अपने जीवन को पूर्ण रूप से कृष्ण भक्ति, साधना और लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

लोकप्रियता और आधुनिक मीरा की पहचान

साध्वी प्रेम बाईसा की कथाओं की विशेषता उनकी सरल भाषा, भावनात्मक गहराई और मधुर भजन शैली है। वे कठिन आध्यात्मिक विषयों को भी आम जनमानस की भाषा में प्रस्तुत करती हैं। इसी कारण वे बहुत कम समय में अत्यंत लोकप्रिय हो गईं और उनके लाखों श्रद्धालु बन गए। कृष्ण भक्ति में उनकी तल्लीनता के कारण श्रद्धालु उन्हें आधुनिक मीरा के रूप में देखते हैं।

साधना कुटी आश्रम और उसका उद्घाटन

साध्वी प्रेम बाईसा ने जोधपुर के पाल रोड स्थित आरती नगर में साध्वी प्रेम बाईसा साधना कुटी आश्रम की स्थापना की। यह आश्रम साधना, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। इस आश्रम का भव्य उद्घाटन समारोह दिसंबर 2024 में आयोजित किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम 3 दिसंबर से 9 दिसंबर 2024 तक चला, जिसमें देश-भर से संत, महंत, श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस ऐतिहासिक अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती महाराज की पावन उपस्थिति रही, जिसने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। इसके साथ ही बाबा रामदेव भी समारोह में सम्मिलित हुए और उन्होंने आश्रम के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया।कार्यक्रम में मोटनाथ महाराज, जगदीशपुरी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ। संतों की उपस्थिति और श्रद्धालुओं की भारी संख्या ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और स्मरणीय बना दिया।

साधना कुटी आश्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को आत्मचिंतन, सदाचार, सेवा और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करता है। यहाँ सत्संग, भजन, ध्यान और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से लोगों को आंतरिक शांति का अनुभव कराया जाता है।

विचार और संदेश

साध्वी प्रेम बाईसा का संदेश अत्यंत सरल और गहन है
प्रेम ही धर्म है, सेवा ही साधना है और भक्ति ही जीवन का सार है।
वे युवाओं और महिलाओं को आत्मबल, आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।

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