बाड़मेर, 25 अक्टूबर 2026: राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले में कम बारिश के कारण किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खरीफ फसल वर्ष 2026 (संवत् 2083) में बारिश की कमी, भूजल स्तर में गिरावट और फसलों की कमजोर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने जिले की नौ तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया है। वहीं, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने पहले चरण में 10 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में चारा डिपो खोलने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। हालांकि, बाटाडू, नोखड़ा और बाड़मेर तहसील को लेकर अलग से सामने आई जानकारी के कारण सूखाग्रस्त क्षेत्रों की स्थिति पर सवाल भी उठ रहे हैं। ऐसे में किसानों और पशुपालकों के लिए सरकारी अधिसूचना तथा संबंधित क्षेत्रों की अंतिम स्थिति को समझना जरूरी है।
बाड़मेर की इन 9 तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया गया
आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की 24 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार, खरीफ फसल वर्ष 2026 में कम बारिश और कृषि परिस्थितियों के आकलन के आधार पर बाड़मेर जिले की निम्नलिखित नौ तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
- गडरारोड
- चौहटन
- बाड़मेर
- बायतू
- सेड़वा
- रामसर
- शिव
- धनाऊ
- बाड़मेर (ग्रामीण)
इस घोषणा का उद्देश्य सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत संबंधी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाना और किसानों तथा पशुपालकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार करना है।
बाटाडू, नोखड़ा और बाड़मेर तहसील को लेकर क्या है स्थिति
सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उपलब्ध अपडेट के अनुसार, बाटाडू, नोखड़ा और बाड़मेर तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की पुष्टि अलग से स्पष्ट नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, नोखड़ा और बाटाडू क्षेत्रों में ग्राउंड ट्रूथिंग यानी मौके पर जाकर वास्तविक परिस्थितियों के सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके बाद संबंधित प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे गए हैं। इन प्रस्तावों पर राज्य सरकार का अंतिम निर्णय आने के बाद ही इन क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट होगी। यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी क्षेत्र में सूखे जैसे हालात होना, उसका सर्वे होना और उसे औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जाना अलग-अलग चरण हैं।
बाड़मेर में 10 स्थानों पर खुलेंगे चारा डिपो
सूखे के कारण पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत की दिशा में कदम उठाया है। जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल ने पहले चरण में शिव, रामसर और गडरारोड तहसीलों की 10 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में चारा डिपो खोलने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। इन डिपो के माध्यम से पात्र पशुपालकों को निर्धारित नियमों के अनुसार अनुदानित दर पर पशु चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य पशुधन का संरक्षण करना और चारे की बढ़ती लागत से परेशान छोटे तथा सीमांत किसानों को राहत देना है।
चारा डिपो कहां-कहां खोले जाएंगे
जिला प्रशासन की ओर से जारी स्वीकृति के अनुसार, चारा डिपो के लिए चयनित ग्राम सेवा सहकारी समितियों की सूची इस प्रकार है।
| तहसील | चयनित ग्राम सेवा सहकारी समितियां |
|---|---|
| शिव | स्वामी का गांव, गूंगा, हड़वा, बिसू कला और उंडू |
| रामसर | देरासर, भाचभर और बबुगुलेरिया |
| गडरारोड | जैसिंधर गांव और गडरारोड |
इस प्रकार पहले चरण में कुल 10 समितियों के माध्यम से चारा वितरण की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के बाद डिपो का संचालन संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
पशुपालकों को किस तरह मिलेगा सस्ता चारा
चारा डिपो खोलने का प्रमुख उद्देश्य अभावग्रस्त क्षेत्रों में पशुपालकों को उचित दर पर चारा उपलब्ध कराना है। इसके लिए निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार वितरण किया जाएगा।
- पात्र पशुपालकों को अनुदानित दर पर चारा उपलब्ध कराया जाएगा।
- चारे का वितरण बिना लाभ-हानि के आधार पर किया जाएगा।
- चारे की खरीद, परिवहन और वितरण से संबंधित रिकॉर्ड रखा जाएगा।
- संबंधित समितियों को सत्यापन और अभिलेख संधारण के नियमों का पालन करना होगा।
- संबंधित अधिकारी डिपो के संचालन और वितरण व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे चारा डिपो से मिलने वाली सुविधा, पात्रता और वितरण की तारीखों की जानकारी अपनी ग्राम सेवा सहकारी समिति या स्थानीय प्रशासन से प्राप्त करें।
बालोतरा जिले में भी कई क्षेत्रों को लेकर सवाल
बाड़मेर के साथ-साथ बालोतरा जिले में भी कम बारिश और चारे की कमी को लेकर चिंता बनी हुई है। सामने आए एक अन्य अपडेट में गिड़ा, पाटोदी, समदड़ी, सिवाना, सिणधरी, पचपदरा और धोरीमन्ना जैसे क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन क्षेत्रों की अंतिम स्थिति और लागू राहत प्रावधानों की पुष्टि संबंधित सरकारी अधिसूचना से की जानी चाहिए। केवल सूखाग्रस्त घोषित नहीं होने की जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वहां किसी भी प्रकार की राहत या पेयजल व्यवस्था लागू नहीं है।
पेयजल और पशुधन संरक्षण पर भी प्रशासन का ध्यान
कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता, पेयजल आपूर्ति और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी चुनौती बन सकती है। जिला प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार से चारा डिपो, पशु शिविर और पेयजल परिवहन से संबंधित स्वीकृतियां प्राप्त हुई हैं। कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार राहत व्यवस्था को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। चारा डिपो की शुरुआत और अन्य राहत सुविधाओं का वास्तविक लाभ संबंधित क्षेत्रों में निर्धारित नियमों के अनुसार मिलेगा। इसलिए किसानों और पशुपालकों को स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी नवीनतम सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
सूखे की स्थिति में किसानों को अपनी फसलों, पशुओं और पानी की जरूरतों के संबंध में स्थानीय प्रशासन से संपर्क बनाए रखना चाहिए। चारा डिपो की पात्रता, वितरण प्रक्रिया और अन्य सहायता के बारे में ग्राम सेवा सहकारी समिति से जानकारी ली जा सकती है। वहीं, जिन क्षेत्रों का सर्वे पूरा हो चुका है लेकिन अंतिम सरकारी निर्णय लंबित है, वहां के लोगों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए। इससे अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होगी।
बाड़मेर जिले में कम बारिश के कारण पैदा हुई परिस्थितियों के बीच नौ तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किए जाने और पहले चरण में 10 चारा डिपो खोलने की स्वीकृति को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पात्र पशुपालकों को रियायती दर पर चारा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
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बाड़मेर सूखा राहत 2026 से जुड़े (FAQ)
1. बाड़मेर जिले की कितनी तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाड़मेर जिले की 9 तहसीलों को गंभीर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इनमें गडरारोड, चौहटन, बाड़मेर, बायतू, सेड़वा, रामसर, शिव, धनाऊ और बाड़मेर (ग्रामीण) शामिल हैं।
2. बाड़मेर में कितने चारा डिपो खोले जाएंगे।
प्रथम चरण में शिव, रामसर और गडरारोड तहसीलों की 10 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में चारा डिपो खोलने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है।
3. पशुपालकों को चारा किस दर पर मिलेगा।
पात्र पशुपालकों को सरकारी नियमों के अनुसार अनुदानित दर पर चारा उपलब्ध कराया जाएगा। वितरण बिना लाभ-हानि के आधार पर किया जाएगा।
4. बाड़मेर में चारा डिपो किन गांवों में खोले जाएंगे।
शिव तहसील में स्वामी का गांव, गूंगा, हड़वा, बिसू कला और उंडू; रामसर तहसील में देरासर, भाचभर और बबुगुलेरिया; तथा गडरारोड तहसील में जैसिंधर गांव और गडरारोड की ग्राम सेवा सहकारी समितियां चयनित की गई हैं।
5. क्या नोखड़ा और बाटाडू को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नोखड़ा और बाटाडू में ग्राउंड ट्रूथिंग का कार्य पूरा करके प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे गए हैं। इन क्षेत्रों की अंतिम स्थिति की पुष्टि आधिकारिक सरकारी आदेश से की जानी चाहिए।
6. क्या बालोतरा जिले के सभी क्षेत्र सूखाग्रस्त घोषित हुए हैं।
उपलब्ध अपडेट में गिड़ा, पाटोदी, समदड़ी, सिवाना, सिणधरी, पचपदरा और धोरीमन्ना जैसे क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने की जानकारी दी गई है। अंतिम स्थिति के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना देखना जरूरी है।
7. बाड़मेर में सूखा राहत के तहत कौन-कौन सी सुविधाएं मिल सकती हैं।
सरकारी स्वीकृति और निर्धारित पात्रता के अनुसार चारा डिपो, पशु शिविर और पेयजल परिवहन जैसी राहत व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। संबंधित सुविधाओं की उपलब्धता स्थानीय प्रशासन से जांचें।
8. चारा डिपो की जानकारी कहां से प्राप्त करें।
पशुपालक अपने गांव की ग्राम सेवा सहकारी समिति, संबंधित तहसील कार्यालय या जिला प्रशासन से चारा वितरण, पात्रता और संचालन की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
