बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का दूसरा चरण 11 नवंबर 2025 को बड़े पैमाने पर संपन्न हुआ। यह चरण न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था, बल्कि चुनावी माहौल की दिशा तय करने में भी निर्णायक भूमिका निभा रहा था। पहले चरण में मतदाताओं ने जिस उत्साह का परिचय दिया था, उसी जोश और विश्वास के साथ दूसरे चरण में भी लोग भारी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचे। दूसरे चरण में शामिल क्षेत्रों में एक अलग तरह की ऊर्जा दिखाई दी। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक वोटरों की भीड़ सुबह से ही मतदान केंद्रों पर उमड़ पड़ी थी। युवा, महिलाएँ और बुजुर्ग – सभी ने यह सुनिश्चित किया कि वे लोकतांत्रिक अधिकार का पूरा उपयोग करें। यह चरण कई हॉटस्पॉट सीटों वाला था, जहाँ मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा था। यही कारण है कि यह चरण राजनीतिक पार्टियों के लिए अत्यंत महत्व रखता था।
सुबह से शुरू हुआ लोकतंत्र का दूसरा महापर्व
11 नवंबर की सुबह जैसे ही मतदान शुरू हुआ, मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लग चुकी थीं। कई केंद्रों पर लोग खुलने से पहले ही पहुंच गए थे। महिलाओं की उपस्थिति विशेष रूप से अधिक दर्ज की गई, जो दर्शाता है कि बिहार में महिला मतदाता लगातार राजनीतिक दिशा बदलने में अहम भूमिका निभा रही हैं। कई युवा मतदाता अपने दोस्तों के साथ वोट डालने पहुंचे और मतदान को किसी आयोजन की तरह मनाया। पहली बार वोट देने वाले युवाओं के चेहरों पर उत्साह साफ नजर आ रहा था। इस चरण में मौसम ने भी साथ दिया – न तेज धूप, न बारिश – जिससे लोगों को वोट डालने में आसानी रही।
मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सख़्त निगरानी
दूसरे चरण के लिए राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया। कई संवेदनशील क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई और पुलिस बूथ से बूथ घूम कर सुरक्षा स्थिति का जायजा लेती रही। ड्रोन कैमरों, मोबाइल फ्लाइंग स्क्वाड, और विशेष निगरानी टीमों ने पूरे दिन मतदान केंद्रों पर नजर बनाए रखी। कई जिलों में महिलाओं के लिए अलग सखी बूथ बनाए गए थे, जहाँ पूरी टीम महिलाओं की थी – मतदान अधिकारी से लेकर सुरक्षा कर्मी तक। इससे महिला मतदाताओं में और अधिक विश्वास उत्पन्न हुआ। इन सभी व्यवस्थाओं का नतीजा यह रहा कि दूसरे चरण का मतदान कहीं भी बड़े व्यवधान के बिना सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
राजनीतिक दलों की रणनीतियाँ – किसके पक्ष में हवा
दूसरा चरण उन इलाकों में था जहाँ हमेशा से राजनीतिक संघर्ष अधिक रहता है। यहीं से पिछले कई चुनावों में सत्ता का रास्ता खुला है। इसलिए इस चरण को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीतियाँ भी बेहद आक्रामक थीं।
● NDA
NDA के स्टार प्रचारकों ने इस चरण पर विशेष फोकस किया था। विकास, सड़क, बिजली, शिक्षा, किसान योजनाएँ और कानून-व्यवस्था इनके मुख्य मुद्दे रहे। कई जगह NDA के स्थानीय नेताओं ने भी जमकर मेहनत की और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया।
● महागठबंधन (MGB)
महागठबंधन ने युवाओं के मुद्दों—बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, छात्र राजनीति और महंगाई-को जोरदार तरीके से उठाया। रैलियों में बड़ी संख्या में भीड़ देखने को मिली और नेताओं ने NDA पर कई सवाल खड़े किए।
● क्षेत्रीय पार्टियाँ
छोटी पार्टियों ने भी इस चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ सीटों पर इनका जनाधार गहरा होने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया, जिससे राजनीतिक समीकरण और रोचक हो गया।
मतदाताओं की सोच – मुद्दों पर आधारित वोटिंग
दूसरे चरण के दौरान मतदाताओं के बीच घूमने पर महसूस होता था कि लोग अब मुद्दों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। जाति और परंपरागत वोट बैंक की राजनीति को चुनौती देते हुए लोग अपने क्षेत्र की समस्याओं पर खुलकर चर्चा कर रहे थे। मतदाताओं की प्राथमिकताएँ:- बेहतर सड़कें और बिजली, सुरक्षित वातावरण, युवाओं के लिए रोजगार, सरकारी अस्पतालों की स्थिति, शिक्षा व्यवस्था, महिला सुरक्षा, किसानों को लाभ और सिंचाई की सुविधाएँ,
एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा कि वे सिर्फ वही सरकार चाहते हैं जो काम करे, चाहे पार्टी कोई भी हो। वहीं एक कॉलेज छात्रा ने कहा कि वह रोजगार और शिक्षा को ध्यान में रखकर वोट कर रही हैं। इससे साफ पता चलता है कि मतदाता अब अपनी जिम्मेदारी को समझ चुके हैं और सोच-समझकर मतदान कर रहे हैं।
सोशल मीडिया की भूमिका – युवा बन रहे चुनावी माहौल का केंद्र
दूसरे चरण में सोशल मीडिया का प्रभाव पहले चरण से भी ज्यादा देखने को मिला। Instagram Reels, WhatsApp स्टेटस, Facebook पोस्ट और Twitter अपडेट्स ने चुनाव में एक डिजिटल ऊर्जा भर दी। कई मतदाताओं ने मतदान केंद्रों से लाइव वीडियो बनाए। राजनीतिक दलों ने अंतिम समय तक डिजिटल कैंपेन चलाए। युवाओं ने “Vote for Change” और “Go Vote Bihar” जैसे हैशटैग चलाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का यह माहौल न केवल जागरूकता बढ़ा रहा था, बल्कि लोगों को प्रेरित भी कर रहा था कि वे अपने घरों से निकलकर मतदान करें।
महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी – चुनाव का सबसे मजबूत संकेत
11 नवंबर के मतदान में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई गांवों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा। यह बताता है कि महिलाओं ने इस चुनाव को सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम माना है। महिलाएँ राशन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्कूलों की स्थिति और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर बेहद गंभीर थीं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज़ चुनाव परिणामों में साफ सुनी जाएगी।
दूसरे चरण के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
मतदान खत्म होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। टीवी चैनलों पर डिबेट, सोशल मीडिया पर अनुमान, और राजनीतिक पार्टियों के दावे—इन सबने माहौल को और गर्म कर दिया। कुछ जगह NDA का प्रभाव मजबूत माना जा रहा था, जबकि कई क्षेत्रों में विरोधी दल भी बराबरी की टक्कर दे रहे थे।विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे चरण ने कई समीकरण बदल दिए हैं और अब चुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
लोकतंत्र का सशक्त प्रदर्शन – बिहार की जनता ने दिया संदेश
11 नवंबर 2025 का दूसरा चरण एक बार फिर इस बात को साबित कर गया कि बिहार की जनता लोकतंत्र को दिल से मानती है। मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत है कि लोग सिर्फ शिकायत नहीं कर रहे, बल्कि बदलाव की दिशा में कदम भी उठा रहे हैं। यह चरण लोकतंत्र, जागरूकता और जिम्मेदारी का सुंदर मिश्रण था।
बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण न केवल मतदान के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत प्रभावशाली साबित हुआ। मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी, शांतिपूर्ण माहौल, सुरक्षा व्यवस्थाओं की मजबूती और मुद्दों पर आधारित वोटिंग ने इस चरण को खास बना दिया। 11 नवंबर का दिन बिहार की लोकतांत्रिक शक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया-जहाँ मतदाताओं ने साबित किया कि वे एक बेहतर भविष्य की दिशा में गंभीरता से सोच रहे हैं। अब सबकी नजर अंतिम परिणामों पर है, जो यह तय करेगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाती है।