बिजली का बिल लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में घरों में सोलर पैनल लगवाने का चलन भी तेजी से बढ़ा है। अब लोग पंखे, कूलर, फ्रिज और दूसरी इलेक्ट्रॉनिक चीजों के साथ वॉशिंग मशीन को भी सोलर पावर से चलाने के बारे में सोच रहे हैं। अगर आप भी वॉशिंग मशीन को सोलर से चलाना चाहते हैं, तो आपके मन में सबसे पहले यही सवाल आएगा कि इसके लिए कितने सोलर पैनल की जरूरत होगी। इसका जवाब हर मशीन के लिए एक जैसा नहीं होता, क्योंकि बिजली की खपत मशीन के मॉडल और उसके इस्तेमाल पर निर्भर करती है।
वॉशिंग मशीन कितनी बिजली खर्च करती है
वॉशिंग मशीन की बिजली खपत उसके मॉडल, मोटर, क्षमता और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है। इसलिए सोलर सिस्टम लगाने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी मशीन एक बार चलने में कितनी बिजली लेती है और आप उसे हफ्ते में कितनी बार इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कोई वॉशिंग मशीन एक वॉश साइकल में करीब 0.6 kWh बिजली इस्तेमाल करती है। अगर इसे हफ्ते में 4 बार चलाया जाता है, तो सालभर में इसकी खपत करीब 125 kWh के आसपास हो सकती है। यह सिर्फ समझाने के लिए दिया गया अनुमान है। आपकी वॉशिंग मशीन की वास्तविक खपत इससे कम या ज्यादा हो सकती है। खासकर अगर मशीन में गर्म पानी का इस्तेमाल होता है या उसे ज्यादा देर तक चलाया जाता है, तो बिजली की खपत बढ़ सकती है।
Solar से वॉशिंग मशीन चलाने के लिए कितने पैनल चाहिए
अब सवाल आता है कि इतनी बिजली के लिए कितने सोलर पैनल की जरूरत होगी। इसे समझने के लिए पैनल की क्षमता के साथ-साथ आपके इलाके में मिलने वाली धूप और सिस्टम में होने वाले बिजली के नुकसान को भी ध्यान में रखना पड़ता है। मान लीजिए आपके पास 400W का एक सोलर पैनल है। अगर किसी दिन औसतन करीब 4 घंटे अच्छी धूप मिलती है और सिस्टम की सामान्य दक्षता को ध्यान में रखा जाए, तो यह पैनल एक दिन में लगभग 1.2 kWh के आसपास उपयोगी बिजली दे सकता है। सालभर में यह मात्रा लगभग 438 kWh तक पहुंच सकती है।
ऐसे में ऊपर दिए गए उदाहरण वाली वॉशिंग मशीन की करीब 125 kWh सालाना जरूरत के मुकाबले 400W का एक पैनल पर्याप्त हो सकता है। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि पूरा सोलर सिस्टम केवल वॉशिंग मशीन के हिसाब से तय नहीं किया जाता। अगर इसी सिस्टम से फ्रिज, पंखा, टीवी या दूसरे उपकरण भी चलाने हैं, तो ज्यादा क्षमता वाले सोलर पैनल की जरूरत होगी।
सोलर पैनल लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोलर सिस्टम का साइज तय करते समय सिर्फ वॉशिंग मशीन की बिजली खपत देखना पर्याप्त नहीं है। मशीन को कितनी बार चलाया जाता है, आपके इलाके में कितनी धूप मिलती है और पैनल पर किसी पेड़ या इमारत की छाया तो नहीं पड़ती, इन सभी चीजों का असर बिजली उत्पादन पर पड़ता है। पैनल की क्षमता भी मौसम के साथ बदल सकती है। तेज धूप में उत्पादन बेहतर रहता है, जबकि बादल, बारिश या सर्दियों के दिनों में आउटपुट कम हो सकता है। इसलिए सिस्टम को थोड़ा मार्जिन रखकर लगाना ज्यादा बेहतर रहता है। अगर वॉशिंग मशीन को रात में या बिजली कटने के दौरान सोलर से चलाना है, तो बैटरी और इन्वर्टर की जरूरत भी पड़ सकती है। वहीं ग्रिड से जुड़े सिस्टम में दिन के समय बनने वाली सोलर बिजली का सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। वॉशिंग मशीन को सोलर पावर से चलाने के लिए कितने पैनल चाहिए, इसका कोई एक तय जवाब नहीं है। यह मशीन की बिजली खपत, इस्तेमाल और सोलर सिस्टम की क्षमता पर निर्भर करता है।
