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The History > Religion > Navratri Day 6 !! मां कात्यायनी का महत्व, कथा और दिव्य शक्ति
Religion

Navratri Day 6 !! मां कात्यायनी का महत्व, कथा और दिव्य शक्ति

Chetana Choudhary
Last updated: March 24, 2026 12:27
Chetana Choudhary - Written by
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सिंह पर विराजमान मां कात्यायनी का दिव्य स्वरूप नवरात्रि के छठे दिन की देवी
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नवरात्रि का पावन पर्व देवी शक्ति की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ माता की आराधना करते हैं और उनसे जीवन में सुख, समृद्धि और शक्ति की कामना करते हैं।

Contents
मां कात्यायनी के नाम का अर्थ और देवी का दिव्य स्वरूपमां कात्यायनी से जुड़ी पौराणिक कथानवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का महत्वमां कात्यायनी की पूजा करने की विधिमां कात्यायनी का मंत्रमां कात्यायनी की आरतीमां कात्यायनी को अर्पित किए जाने वाले भोगआध्यात्मिक दृष्टि से मां कात्यायनी का स्वरूपमां कात्यायनी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां कात्यायनी को शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार उनका जन्म एक महान उद्देश्य के लिए हुआ था। उन्होंने महिषासुर नामक अत्यंत शक्तिशाली असुर का वध करके संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसलिए उन्हें दानवों का विनाश करने वाली देवी भी कहा जाता है।

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि जब भी अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब देवी शक्ति संसार की रक्षा के लिए अवतार लेती हैं।

मां कात्यायनी के नाम का अर्थ और देवी का दिव्य स्वरूप

मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं और उनका नाम महान ऋषि कात्यायन से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऋषि कात्यायन ने देवी की कठोर तपस्या की थी और उनसे प्रार्थना की थी कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उनके घर जन्म लिया। इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनके चार हाथ होते हैं। उनके हाथों में तलवार, कमल और अन्य दिव्य अस्त्र-शस्त्र होते हैं, जबकि एक हाथ वरमुद्रा में होता है जिससे वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, साहस और न्याय का प्रतीक माना जाता है। देवी का चेहरा तेज और करुणा से भरा होता है, जो यह दर्शाता है कि वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत दयालु हैं लेकिन अधर्म और अन्याय का नाश करने में कठोर भी हैं।

मां कात्यायनी से जुड़ी पौराणिक कथा

मां कात्यायनी की कथा महिषासुर नामक असुर से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर अत्यंत शक्तिशाली दानव था जिसने देवताओं और मानवों को बहुत परेशान कर दिया था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई भी देवता या पुरुष उसे नहीं मार सकता।

इस वरदान के कारण महिषासुर अत्यंत अहंकारी हो गया और उसने तीनों लोकों में अत्याचार करना शुरू कर दिया। तब देवताओं ने मिलकर देवी शक्ति का आह्वान किया। सभी देवताओं की शक्तियों से मिलकर देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। देवी दुर्गा ने कात्यायनी के रूप में जन्म लिया और महिषासुर से युद्ध किया। कई दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद देवी ने महिषासुर का वध कर दिया। इस प्रकार संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति मिली।

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का महत्व

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन साहस, शक्ति और न्याय का प्रतीक होता है। भक्त इस दिन देवी की आराधना करके अपने जीवन से भय और नकारात्मकता को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कात्यायनी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति का विकास होता है। उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के मार्ग खुलते हैं। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और पूरे दिन देवी के मंत्रों का जाप करते हैं। मंदिरों और घरों में भक्ति गीत और आरती के माध्यम से माता की स्तुति की जाती है। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि जीवन में साहस और सत्य के मार्ग पर चलना बहुत महत्वपूर्ण है।

मां कात्यायनी की पूजा करने की विधि

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके वहां माता कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। सबसे पहले दीपक और धूप जलाकर देवी का आह्वान किया जाता है। इसके बाद माता को फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित किया जाता है। भक्त मां कात्यायनी के मंत्र का जाप करते हैं और दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का पाठ करते हैं।

पूजा के अंत में माता की आरती की जाती है और प्रसाद को सभी भक्तों में वितरित किया जाता है। पूजा के दौरान मन को शांत और पवित्र रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है क्योंकि सच्ची भक्ति से ही देवी की कृपा प्राप्त होती है।

मां कात्यायनी का मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

इस मंत्र का नियमित जाप करने से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मां कात्यायनी की आरती

जय कात्यायनी माता, मैया जय कात्यायनी माता।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव दाता॥

सिंह वाहन सोहे, खड्ग त्रिशूल धारी।
भक्तों के संकट हरती, करती कृपा तुम्हारी॥

शक्ति और साहस की देवी, रूप तुम्हारा न्यारा।
अधर्म का नाश कर, करती जग उद्धारा॥

जो कोई आरती गावै, मनवांछित फल पावे।
दुख दरिद्र मिट जावें, सुख संपत्ति घर आवे॥

जय कात्यायनी माता, मैया जय कात्यायनी माता।

मां कात्यायनी को अर्पित किए जाने वाले भोग

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शहद माता को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से भक्तों के जीवन में मिठास और समृद्धि आती है। इसके अलावा भक्त उन्हें फल, मिठाई और खीर भी अर्पित करते हैं। भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद को सभी भक्तों में वितरित किया जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से मां कात्यायनी का स्वरूप

मां कात्यायनी का स्वरूप हमें यह सिखाता है कि जीवन में साहस, सत्य और न्याय का मार्ग अपनाना चाहिए। जब व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को पहचान लेता है, तब वह किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना कर सकता है। देवी का यह स्वरूप यह भी दर्शाता है कि धर्म और सत्य की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। जब व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बनाए रखता है, तब उसके जीवन में सफलता और सुख का मार्ग खुलता है।

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी की पूजा को समर्पित होता है। उन्हें शक्ति, साहस और न्याय की देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों के जीवन में आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

जय माता दी।

मां कात्यायनी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां कात्यायनी कौन हैं?

मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं और उन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है।

नवरात्रि के छठे दिन किस देवी की पूजा की जाती है?

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।

मां कात्यायनी का वाहन क्या है?

मां कात्यायनी का वाहन सिंह माना जाता है जो शक्ति और साहस का प्रतीक है।

मां कात्यायनी के कितने हाथ हैं?

मां कात्यायनी के चार हाथ हैं और उनके हाथों में तलवार, कमल और अन्य अस्त्र-शस्त्र होते हैं।

मां कात्यायनी को कौन सा भोग लगाया जाता है?

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा करने से क्या लाभ होता है?

मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मां कात्यायनी का मंत्र क्या है?

मां कात्यायनी का प्रसिद्ध मंत्र है: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी।

मां कात्यायनी का महत्व क्या है?

मां कात्यायनी को शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।

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