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The History > Religion > नवरात्रि का चौथा दिन !! मां कूष्मांडा की महिमा, कथा और देवी की दिव्य शक्ति
Religion

नवरात्रि का चौथा दिन !! मां कूष्मांडा की महिमा, कथा और देवी की दिव्य शक्ति

Jogendar Choudhary
Last updated: March 24, 2026 11:16
Jogendar Choudhary
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सिंह पर विराजमान मां कूष्मांडा का दिव्य स्वरूप नवरात्रि के चौथे दिन की देवी
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नवरात्रि का पावन पर्व देवी शक्ति की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस उत्सव के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें सामूहिक रूप से नवदुर्गा कहा जाता है। नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। इस दिन भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी की आराधना करते हैं और उनसे अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मां कूष्मांडा को सृष्टि की जननी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब पूरे ब्रह्मांड में अंधकार ही अंधकार था और सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था, तब देवी ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें ब्रह्मांड की सृजनकर्ता माना जाता है। उनका यह स्वरूप ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

Contents
मां कूष्मांडा के नाम का अर्थ और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णनमां कूष्मांडा से जुड़ी पौराणिक कथानवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजामां कूष्मांडा की पूजा करने की विधिमां कूष्मांडा के मंत्र का महत्वमां कूष्मांडा को अर्पित किए जाने वाले भोगमां कूष्मांडा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नवरात्रि के चौथे दिन देवी की पूजा करने से भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि सकारात्मक सोच और विश्वास के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है। मां कूष्मांडा का स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि सृजन, ऊर्जा और प्रकाश की शक्ति हमारे भीतर भी मौजूद है।

मां कूष्मांडा के नाम का अर्थ और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन

मां कूष्मांडा नवदुर्गा का चौथा स्वरूप हैं और उनका नाम उनके अद्भुत कार्य से जुड़ा हुआ है। “कूष्मांडा” शब्द का अर्थ है वह शक्ति जिसने एक छोटे से ऊर्जा स्रोत से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि देवी ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है। मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनके आठ हाथ होते हैं। इसी कारण उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और पवित्र वस्तुएं होती हैं, जैसे कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला। इन सभी वस्तुओं का संबंध शक्ति, ज्ञान और समृद्धि से माना जाता है। उनका चेहरा तेज और करुणा से भरा हुआ बताया जाता है। उनका यह स्वरूप यह दर्शाता है कि देवी शक्ति केवल विनाश की नहीं बल्कि सृजन की भी प्रतीक हैं। उनकी आराधना से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

मां कूष्मांडा से जुड़ी पौराणिक कथा

मां कूष्मांडा की कथा सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़ी हुई मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि का निर्माण नहीं हुआ था और चारों ओर गहरा अंधकार था, तब देवी ने कूष्मांडा के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मांड की रचना की। कहा जाता है कि देवी ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया और सूर्य मंडल के भीतर निवास करने लगीं। ऐसा माना जाता है कि सूर्य की ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत भी मां कूष्मांडा ही हैं। उनकी शक्ति इतनी प्रबल मानी जाती है कि वे सूर्य के केंद्र में रहते हुए भी पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करती हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार देवी के इस स्वरूप ने सृष्टि में जीवन का संचार किया। इसी कारण उन्हें ब्रह्मांड की जननी कहा जाता है।

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक होता है। भक्त इस दिन माता की आराधना करके अपने जीवन में स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कूष्मांडा की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है। उनकी कृपा से रोग, भय और नकारात्मकता दूर होती है। यह भी माना जाता है कि उनकी आराधना से मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है।

नवरात्रि के इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और पूरे दिन देवी के मंत्रों का जाप करते हैं। मंदिरों और घरों में भक्ति गीत और आरती के माध्यम से माता की स्तुति की जाती है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का बहुत महत्व है।

मां कूष्मांडा की पूजा करने की विधि

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके वहां माता कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। सबसे पहले दीपक और धूप जलाकर देवी का आह्वान किया जाता है। इसके बाद माता को फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई भक्त इस दिन दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं। पूजा के दौरान मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में माता की आरती की जाती है और प्रसाद को सभी भक्तों में वितरित किया जाता है। पूजा करते समय मन को शांत और पवित्र रखना बहुत आवश्यक माना जाता है क्योंकि सच्ची भक्ति से ही देवी की कृपा प्राप्त होती है।

मां कूष्मांडा के मंत्र का महत्व

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मंत्र देवी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए किया जाता है।

मंत्र

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

इस मंत्र का नियमित जाप करने से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंत्र मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।

मां कूष्मांडा की आरती

जय मां कूष्मांडा, मैया जय मां कूष्मांडा।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव दाता॥

अष्टभुजा धारी माता, सिंह वाहन सोहे।
भक्तों के संकट हरती, सुख समृद्धि जो दे॥

कमल गदा चक्र धारी, रूप तुम्हारा प्यारा।
सृष्टि की जननी माता, करती जग उद्धारा॥

जो कोई आरती गावै, मनवांछित फल पावे।
दुख दरिद्र मिट जावें, सुख संपत्ति घर आवे॥

जय मां कूष्मांडा, मैया जय मां कूष्मांडा।

मां कूष्मांडा को अर्पित किए जाने वाले भोग

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ या मीठे पकवान का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भोग देवी को अत्यंत प्रिय माना जाता है और इसे अर्पित करने से भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि आती है। इसके अलावा भक्त उन्हें फल, मिठाई, खीर और मिश्री भी अर्पित करते हैं। भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद को सभी भक्तों में वितरित किया जाता है। यह परंपरा भक्तों के बीच प्रेम, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।

मां कूष्मांडा का स्वरूप हमें यह सिखाता है कि सृजन और सकारात्मक ऊर्जा जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा की पूजा को समर्पित होता है। उन्हें सृष्टि की जननी और ऊर्जा की देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर भक्त माता से यही प्रार्थना करते हैं कि वे सभी के जीवन में स्वास्थ्य, सफलता और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करें।

जय माता दी।

मां कूष्मांडा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां कूष्मांडा कौन हैं?

मां कूष्मांडा नवदुर्गा का चौथा स्वरूप हैं और उन्हें सृष्टि की जननी माना जाता है।

नवरात्रि के चौथे दिन किस देवी की पूजा की जाती है?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।

मां कूष्मांडा का वाहन क्या है?

मां कूष्मांडा का वाहन सिंह माना जाता है जो शक्ति और साहस का प्रतीक है।

मां कूष्मांडा के कितने हाथ हैं?

मां कूष्मांडा के आठ हाथ होते हैं इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है।

मां कूष्मांडा को कौन सा भोग लगाया जाता है?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ या मीठे पकवान का भोग लगाया जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा करने से क्या लाभ होता है?

मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता का संचार होता है।

मां कूष्मांडा का प्रिय रंग कौन सा है?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा का प्रिय रंग नारंगी माना जाता है।

मां कूष्मांडा का मंत्र क्या है?

मां कूष्मांडा का प्रसिद्ध मंत्र है: सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

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