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गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन में बवाल, रविंद्र सिंह भाटी ने किया आत्मदाह करने का प्रयास

Jogendar Choudhary
Last updated: May 27, 2026 10:35
Jogendar Choudhary
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बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन के दौरान प्रदर्शन करते मजदूर और रविंद्र सिंह भाटी
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राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित गिरल लिग्नाइट माइंस को लेकर चल रहा मजदूर आंदोलन अब बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। पिछले 39 दिनों से जारी धरना मंगलवार को उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब शिव विधायक Ravindra Singh Bhati ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उन्हें रोक लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद बाड़मेर जिला मुख्यालय पर तनावपूर्ण माहौल बन गया। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर हजारों की संख्या में मौजूद मजदूर और समर्थक लगातार नारेबाजी करते रहे, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कलेक्ट्रेट के सभी गेट बंद कर दिए। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया दरअसल, गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर मजदूर लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारी मजदूरों का कहना है कि स्थानीय लोगों के साथ रोजगार और कामकाज के मुद्दों पर लगातार अन्याय हो रहा है। इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विशाल मजदूर आंदोलन जनसभा का आह्वान किया था। जनसभा के बाद बड़ी संख्या में लोग जिला कलेक्ट्रेट घेराव के लिए रवाना हुए।

Contents
मजदूर आंदोलनमजदूरों की मुख्य मांगेंरविंद्र सिंह भाटी के समर्थन से आंदोलन को मिली नई ताकतकलेक्ट्रेट परिसर में अचानक बढ़ा तनावहाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी प्रशासनिक सख्ती

मजदूर आंदोलन

गिरल लिग्नाइट माइंस और आसपास के क्षेत्रों में वर्षों पहले जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उस समय रोजगार और विकास के बड़े वादे किए गए थे। ग्रामीणों और मजदूरों का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि माइंस और उससे जुड़े कार्यों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

लेकिन आंदोलनकारी मजदूरों का आरोप है कि समय बीतने के साथ ये वादे अधूरे रह गए। कई स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार नहीं मिला और जो लोग पहले कार्यरत थे, उनमें से भी कई को धीरे-धीरे काम से बाहर किया जाने लगा। इसी कारण क्षेत्र में असंतोष बढ़ता गया। धरने पर बैठे मजदूरों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे रोजगार सुरक्षा, उचित कार्य समय और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने जैसी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। आंदोलनकारियों का आरोप है कि कंपनियां बाहरी लोगों को रोजगार दे रही हैं जबकि स्थानीय लोग बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। 9 अप्रैल से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया। स्थानीय संगठनों और मजदूर यूनियनों के साथ-साथ राजनीतिक समर्थन भी आंदोलन को मिलने लगा। इसी दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी खुलकर मजदूरों के समर्थन में सामने आए।

मजदूरों की मुख्य मांगें

धरने पर बैठे मजदूरों ने प्रशासन और संबंधित कंपनियों के सामने कई मांगें रखी हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह रोजगार और श्रमिक हितों से जुड़ी हुई हैं। मजदूरों की प्रमुख मांगों में स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता देना सबसे बड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि जिन गांवों और क्षेत्रों की जमीन परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई, वहां के लोगों को रोजगार में पहला अधिकार मिलना चाहिए। इसके अलावा मजदूर 8 घंटे की निर्धारित ड्यूटी लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर काम के घंटे तय नियमों से अधिक हैं, जिससे श्रमिकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। मजदूरों की एक और प्रमुख मांग यह है कि पहले किए गए रोजगार संबंधी वादों को लागू किया जाए। आंदोलनकारी चाहते हैं कि जिन स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, उन्हें स्थायी रूप से काम पर रखा जाए। कुछ प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि हाल के समय में कई मजदूरों को काम से हटाया गया, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। यही कारण है कि आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है।

रविंद्र सिंह भाटी के समर्थन से आंदोलन को मिली नई ताकत

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले कई दिनों से इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने मजदूरों के धरने में शामिल होकर प्रशासन और कंपनियों पर स्थानीय लोगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में भाटी ने साफ कहा था कि यदि मजदूरों की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। इसके बाद मंगलवार को विशाल मजदूर आंदोलन जनसभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर, ग्रामीण और समर्थक शामिल हुए। जनसभा के बाद हजारों लोग वाहनों और पैदल मार्च के रूप में जिला मुख्यालय की ओर बढ़ने लगे। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को बाड़मेर शहर में प्रवेश से पहले बीएसएफ गेट के पास रोक दिया। इसके बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी मजदूरों के साथ पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गए।

कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक बढ़ा तनाव

जब प्रदर्शनकारी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे तो माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विरोध के दौरान खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। इसके बाद उन्होंने माचिस जलाने की कोशिश भी की। इस घटना से वहां मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद एएसपी नितेश आर्य और अन्य पुलिस अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए भाटी को पकड़ लिया और सुरक्षित कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर ले गए। यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई नहीं करती तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के तुरंत बाद कलेक्ट्रेट परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। बाहर मौजूद प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते रहे। कई घंटों तक जिला मुख्यालय के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। पूरे राजस्थान में इस घटना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी प्रशासनिक सख्ती

इस पूरे घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरल माइंस से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए थे। अदालत ने ठेकेदार कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए लिग्नाइट परिवहन कार्य तुरंत शुरू कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने बाड़मेर पुलिस प्रशासन को साफ निर्देश दिया था कि खनन और परिवहन कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही वाहनों और कर्मचारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के आदेश भी दिए गए थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। यही कारण था कि मंगलवार को बड़े आंदोलन और कलेक्ट्रेट घेराव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। वहीं आंदोलनकारी पक्ष का कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है और उन्हें मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ रहा है।

गिरल लिग्नाइट माइंस विवाद अब केवल मजदूरों के आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बाड़मेर और पश्चिमी राजस्थान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजगार और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे लंबे समय से क्षेत्र में संवेदनशील रहे हैं। यही कारण है कि आंदोलन को बड़ी जनसमर्थन भी मिल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक रविंद्र सिंह भाटी के आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होने से यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। खासकर आत्मदाह प्रयास जैसी घटना ने पूरे मामले को राज्यस्तरीय सुर्खियों में ला दिया है। वहीं प्रशासन और संबंधित कंपनियां लगातार यह कह रही हैं कि खनन और परिवहन कार्य कानून और नियमों के तहत किया जा रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय तक कार्य बाधित रहने से सरकार, कंपनियों और स्थानीय रोजगार-तीनों पर असर पड़ रहा है।

फिलहाल गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर आंदोलन जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मजदूर संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कराने की बात कह रहा है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रशासन, कंपनियों और आंदोलनकारी पक्ष के बीच वार्ता हो सकती है। हालांकि वर्तमान हालात को देखते हुए विवाद जल्दी सुलझता दिखाई नहीं दे रहा।

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