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The History > Religion > Navratri Day 3 !! मां चंद्रघंटा का महत्व, कथा और आध्यात्मिक रहस्य
Religion

Navratri Day 3 !! मां चंद्रघंटा का महत्व, कथा और आध्यात्मिक रहस्य

Chetana Choudhary
Last updated: March 24, 2026 10:34
Chetana Choudhary - Written by
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नवरात्रि तीसरे दिन की देवी मां चंद्रघंटा सिंह वाहन पर विराजमान
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नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला आध्यात्मिक और धार्मिक उत्सव है जिसमें देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। यह देवी शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक मानी जाती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य बताया गया है, जो भक्तों के मन से भय और नकारात्मकता को दूर करने वाला माना जाता है।

Contents
मां चंद्रघंटा के नाम का अर्थ और उनके दिव्य स्वरूपदेवी चंद्रघंटा से जुड़ी कथानवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्वमां चंद्रघंटा की पूजामां चंद्रघंटा का पवित्र मंत्र और उसका महत्वमां चंद्रघंटा को अर्पित किए जाने वाले भोगमां चंद्रघंटा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां चंद्रघंटा का नाम उनके मस्तक पर स्थित अर्धचंद्र से जुड़ा हुआ है, जो घंटी के आकार का दिखाई देता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता की पूजा करते हैं और उनसे अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन और आत्मबल प्राप्त करने का मार्ग भी दिखाती है। भक्त मानते हैं कि उनकी पूजा करने से भय, चिंता और तनाव दूर होता है तथा व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत बनता है।

मां चंद्रघंटा के नाम का अर्थ और उनके दिव्य स्वरूप

मां चंद्रघंटा नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं और उनका नाम उनके अद्भुत रूप से जुड़ा हुआ है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, जो घंटी के आकार का प्रतीत होता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका यह रूप शक्ति, साहस और जागरूकता का प्रतीक माना जाता है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और वीरता से भरा हुआ बताया गया है। वे सिंह या बाघ पर सवार रहती हैं, जो उनके साहस और पराक्रम का प्रतीक है। उनके दस हाथ होते हैं और प्रत्येक हाथ में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र होते हैं जैसे त्रिशूल, गदा, तलवार, कमल और धनुष-बाण। उनके एक हाथ में वरमुद्रा होती है, जिससे वे अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। उनका चेहरा शांत और करुणामयी होता है, जबकि उनका युद्ध रूप अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। यह रूप यह दर्शाता है कि देवी अपने भक्तों के प्रति दयालु हैं, लेकिन बुराई के नाश के लिए वे अत्यंत शक्तिशाली भी हैं। इसलिए मां चंद्रघंटा को शक्ति और करुणा का संतुलित स्वरूप माना जाता है।

देवी चंद्रघंटा से जुड़ी कथा

मां चंद्रघंटा की कथा देवी पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देवी पार्वती का विवाह भगवान शिव से होने वाला था, तब भगवान शिव का रूप अत्यंत भयानक था। वे भस्म से लिपटे हुए थे और उनके साथ भूत-प्रेतों की सेना थी। इस रूप को देखकर देवी पार्वती के परिवार और अन्य लोग भयभीत हो गए। तब देवी पार्वती ने अपने तेजस्वी और शक्तिशाली रूप को धारण किया। उन्होंने सिंह पर सवार होकर चंद्रघंटा का स्वरूप लिया। इस रूप में वे अत्यंत दिव्य और तेजस्वी दिखाई देती थीं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित था और उनके हाथों में अनेक अस्त्र-शस्त्र थे। देवी के इस दिव्य रूप को देखकर भगवान शिव ने भी अपना सौम्य स्वरूप धारण किया और विवाह की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस प्रकार मां चंद्रघंटा का स्वरूप शक्ति और संतुलन का प्रतीक बन गया।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस दिन देवी की आराधना करके अपने जीवन से भय और नकारात्मकता को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि आती है। उनकी कृपा से मानसिक तनाव और भय समाप्त होता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और पूरे दिन माता के मंत्रों का जाप करते हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा यह संदेश देती है कि जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए साहस और आत्मबल बहुत आवश्यक है। उनकी आराधना से व्यक्ति के भीतर छिपी शक्ति जागृत होती है और वह अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।

मां चंद्रघंटा की पूजा

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष श्रद्धा और विधि के साथ की जाती है। भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके वहां माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है।

सबसे पहले दीपक और धूप जलाकर देवी का आह्वान किया जाता है। इसके बाद माता को फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई भक्त इस दिन दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं। पूजा के दौरान मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में माता की आरती की जाती है और प्रसाद को परिवार के सदस्यों तथा अन्य भक्तों में वितरित किया जाता है। इस दिन मन को शांत और पवित्र रखना बहुत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि सच्ची भक्ति से ही देवी की कृपा प्राप्त होती है।

मां चंद्रघंटा का पवित्र मंत्र और उसका महत्व

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मंत्र देवी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए किया जाता है।

मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥

इस मंत्र का नियमित जाप करने से व्यक्ति के जीवन से भय और नकारात्मकता दूर होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंत्र मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का जाप करते हैं और देवी से अपने जीवन में सुख, शांति और सफलता की कामना करते हैं।

मां चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा, मैया जय मां चंद्रघंटा।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव दाता॥

सिंह वाहन सोहे, खड्ग त्रिशूल धारी।
भक्तों के संकट हरती, करती कृपा तुम्हारी॥

मस्तक चंद्र विराजे, रूप तुम्हारा न्यारा।
शक्ति और साहस की देवी, करती जग उद्धारा॥

जो कोई आरती गावै, मनवांछित फल पावे।
दुख दरिद्र मिट जावें, सुख संपत्ति घर आवे॥

जय मां चंद्रघंटा, मैया जय मां चंद्रघंटा।

मां चंद्रघंटा को अर्पित किए जाने वाले भोग

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह भोग देवी को अत्यंत प्रिय है और इससे भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि आती है। भक्त माता को खीर, मिश्री, फल और अन्य मिठाइयां भी अर्पित करते हैं। भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद को सभी भक्तों में वितरित किया जाता है। यह परंपरा भक्तों के बीच प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है।

नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा को समर्पित होता है। उनकी आराधना से भक्तों को साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

जय माता दी।

मां चंद्रघंटा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां चंद्रघंटा कौन हैं?

मां चंद्रघंटा नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं और नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी पूजा की जाती है। वे साहस, शक्ति और पराक्रम की देवी मानी जाती हैं।

नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा की जाती है?

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप माना जाता है।

मां चंद्रघंटा का वाहन क्या है?

मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह या बाघ माना जाता है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है।

मां चंद्रघंटा के कितने हाथ होते हैं?

मां चंद्रघंटा के दस हाथ होते हैं और उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार, कमल और धनुष-बाण जैसे अस्त्र-शस्त्र होते हैं।

मां चंद्रघंटा को कौन सा भोग लगाया जाता है?

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

मां चंद्रघंटा का प्रिय रंग कौन सा है?

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का प्रिय रंग लाल या सुनहरा माना जाता है, जो शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है।

मां चंद्रघंटा की पूजा करने से क्या लाभ होता है?

मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा भय और नकारात्मकता दूर होती है।

मां चंद्रघंटा का मंत्र क्या है?

मां चंद्रघंटा का प्रसिद्ध मंत्र है: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥

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